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Monday, November 26, 2012

घातक इश्क का विष

दिल की आदत को, बदला जाएगा,
ये दिल जब अपना, पगला जाएगा,

देखेंगे कितना, दम है इश्क में,
अब साँसों तक, ये मसला जाएगा,

करके कब्ज़ा सब, बैठे चोर हैं,
पकड़ो इनको तो, घपला जाएगा,

दे दे गम अपनी, यादों का अगर,
ये गम ही मुझको, बहला जाएगा,

बरसी है मेरी, आँखों में नमी,
कैसे चाहत का, नजला जाएगा,

घातक है चाहत का, विष जो चढ़ा,
मुस्किल से फिर दिन, अगला जाएगा।

12 comments:

  1. सदाNovember 26, 2012 at 12:28 PM

    वाह ... बहुत ही बढिया।

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    1. "अनंत" अरुन शर्माNovember 26, 2012 at 3:09 PM

      शुक्रिया सदा दी

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  • Rajesh KumariNovember 26, 2012 at 12:34 PM

    आपकी उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 27/11/12 को राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका चर्चा मंच पर स्वागत है!

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    1. "अनंत" अरुन शर्माNovember 26, 2012 at 3:57 PM

      बहुत-2 शुक्रिया आदरणीया

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  • विनोद सैनीNovember 27, 2012 at 9:35 AM

    दिल तो दिल है जी प्रेम के अनुरूप तो होगा ही इस पर किसी का जोर नही चलात है

    फेसबुक थीम को बदले

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    1. "अनंत" अरुन शर्माNovember 28, 2012 at 10:59 AM

      बहुत-2 शुक्रिया सैनी साहब

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  • Virendra Kumar SharmaNovember 28, 2012 at 11:41 AM

    देखेंगे कितना ,दम है इश्क में ,

    अब साँसों तक ,ये मसला जाएगा .

    साँसों तक ,अब ये मसला जाएगा ,


    घातक है चाहत का, विष जो चढ़ा,
    मुस्किल से फिर दिन, अगला जाएगा।

    मुश्किल से दिन फ़िर अगला जाएगा .

    बढ़िया प्रस्तुति है दोस्त ,इश्क की परवाज़ भी .

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    1. "अनंत" अरुन शर्माNovember 28, 2012 at 11:55 AM

      तहे दिल से आभार आदरणीय वीरेंद्र सर

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  • Reena MauryaNovember 29, 2012 at 7:25 PM

    लाजवाब...
    :-)

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    1. "अनंत" अरुन शर्माNovember 30, 2012 at 10:48 AM

      शुक्रिया रीना जी

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  • संजय भास्करDecember 2, 2012 at 4:34 PM

    घातक है चाहत का, विष जो चढ़ा,
    मुस्किल से फिर दिन, अगला जाएगा।
    ........छोटे छोटे लाइन , गंभीर भाव

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    1. "अनंत" अरुन शर्माDecember 3, 2012 at 11:49 AM

      शुक्रिया संजय भाई

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