कीमत दर्दे दिल की अदा कर दे,
तू खुद को मेरा खुदा कर दे,
आ जा वापस जिंदगी में फिर,
चाहे सांसों से जुदा कर दे,
गम में जीना हो न हो मरना,
ऐसा मौसम तू सदा कर दे,
तिरछी नज़रों से चला जादू,
मुझको खुदपे तू फ़िदा कर दे,
बेबस लब कह ना सके कुछ भी,
कार्य इतना बेहुदा कर दे.....
वाह ,,, बहुत सुंदर प्रस्तुति,,अरुण जी,,,,
ReplyDeleteRECENT POST...: जिन्दगी,,,,
आदरणीय धीरेन्द्र जी अपना आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखिये.
Deleteगम में जीना हो न हो मरना,
ReplyDeleteऐसा मौसम तू सदा कर दे,
....बहुत खूब! सुन्दर गज़ल...
आदरणीय कैलाश सर इस सराहना के लिए तहे दिल से शुक्रिया
Deletenice
ReplyDeleteआदरणीय रविकर सर बहुत-२ शुक्रिया
Deleteआपकी पोस्ट कल 9/8/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
ReplyDeleteकृपया पधारें
चर्चा - 966 :चर्चाकार-दिलबाग विर्क
तहे दिल से शुक्रिया भ्राताश्री, आपने मेरी पोस्ट को सम्मान दिया
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