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Sunday, August 26, 2012

जख्मों की मुझको, है दौलत नवाजी

जख्मों की मुझको, है दौलत नवाजी,
यादों में जिन्दा, है हर बात ताजी,

नम-2 सी है, भीगी-2 निगाहें,

हारी है मैंने, जीती आज बाजी,

अक्सर सीने में, होती हैं हलचलें,

मरने को साँसे, हैं तैयार राजी,

कहते हैं नैना, सब मेरी कहानी,

पढ़ धीरे-२ , क्या है जल्दबाजी,

कहते हैं सब,  तुम झूठी बेवफा हो,

लेकिन तुम ये, कह दो है झूठ नाजी....

4 comments:

  1. यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur)August 26, 2012 at 3:12 PM

    बहुत खूब



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    1. अरुन शर्माAugust 26, 2012 at 4:04 PM

      सराहना के लिए बहुत-२ शुक्रिया मित्र

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  • दिगम्बर नासवाAugust 29, 2012 at 3:17 PM

    कहते हैं नैना, सब मेरी कहानी,
    पढ़ धीरे-२ , क्या है जल्दबाजी,....

    नैनों की भाषा है ... शीरे शीरे पढेंगे तो समझ आयगी ... सही कहा है ... खूबसूरत शेर ...

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    1. अरुन शर्माAugust 30, 2012 at 12:13 PM

      दिगम्बर सर यूँ ही अपना आशीर्वाद बनाये रखिये, धन्यवाद

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