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आइये आपका हृदयतल से हार्दिक स्वागत है

Saturday, June 9, 2012

दो शब्द बोलता हूँ

दो शब्द बोलता हूँ आज तेरी शान में,
कड़वाहट भर गयी है तेरी जबान में,
तूने दूसरों का दर्द जाने क्यूँ न समझा,
क्या पत्थर हैं लगाये दिल के मकान में,
खुशियाँ लुटा रही थी दिल में दुकान खोल,
मैंने जख्मों को कमाया तेरी दुकान में....

3 comments:

  1. संजय भास्करJune 9, 2012 at 9:15 PM

    बहुत अच्छी प्रस्तुति संवेदनशील हृदयस्पर्शी मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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  2. अरुन शर्माJune 10, 2012 at 11:10 AM

    शुक्रिया संजय भाई

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  3. Reena MauryaJune 13, 2012 at 1:53 PM

    दर्दभरी रचना.
    सुन्दर प्रस्तुति...

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