Pages

आइये आपका हृदयतल से हार्दिक स्वागत है

Saturday, May 26, 2012

बेकार आदमी हो गया

बेकार दिल के खेल में आदमी हो गया,
दर्द- ए -दिल इश्क में लाज़मी हो गया,
रौनक ले गया छीन कर सूरत से कोई,
रंग चेहरे का उतर कर बादमी हो गया,
बचता नहीं कोई भी नज़रों के वार से,
कंगाल दिले महफ़िल में वाग्मी हो गया....

3 comments:

  1. डॉ. जेन्नी शबनमMay 27, 2012 at 11:28 PM

    bahut khoob...

    ReplyDelete
  2. Kailash SharmaMay 28, 2012 at 2:37 PM

    बहुत ख़ूबसूरत रचना...

    ReplyDelete
  3. अरुन शर्माMay 31, 2012 at 4:01 PM

    बहुत बहुत शुक्रिया

    ReplyDelete
Add comment
Load more...

आइये आपका स्वागत है, इतनी दूर आये हैं तो टिप्पणी करके जाइए, लिखने का हौंसला बना रहेगा. सादर