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Sunday, December 9, 2012

हेमंत ऋतु पर कुछ हाइकू

शीतल जल
रविकर किरण
हिम पिघल

आग जलाई
कहर निरंतर
ओढ़ रजाई

चौपट धंधे
हैं चिंतित किसान
छुपे परिंदे

गर्म तसला
मुरझाई फसल
सूर्य निकला

घना कुहासा
खिलखिले सुमन
शीतल भाषा

पौष से माघ
सुरसुरी पवन
पानी सी आग

शुरू गुलाबी
मानव भयभीत
शिशिर बाकी

12 comments:

  1. धीरेन्द्र सिंह भदौरियाDecember 9, 2012 at 8:49 PM

    वाह!!!!!बहुत शानदार सुंदर हाइकू!!

    recent post: रूप संवारा नहीं...

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    1. अरुन शर्मा "अनंत"December 10, 2012 at 1:57 PM

      धन्यवाद धीरेन्द्र सर

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  • Rohitas ghorelaDecember 10, 2012 at 9:48 AM

    हेमंत ऋतू का सारा वर्तांत आ जाता है इन हाइकू में ... गजब के हाइकू की रचना कर डाली है आपने ..
    बधाई स्वीकार करें।

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    1. अरुन शर्मा "अनंत"December 10, 2012 at 1:58 PM

      धन्यवाद मित्र रोहित

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  • Aamir AliDecember 10, 2012 at 10:20 AM

    बिलकुल सही नक्षा खिंचा है।

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    1. अरुन शर्मा "अनंत"December 10, 2012 at 1:58 PM

      शुक्रिया आमिर भाई

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  • सदाDecember 10, 2012 at 1:34 PM

    वाह ... बहुत ही बढिया।

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    1. अरुन शर्मा "अनंत"December 10, 2012 at 1:58 PM

      धन्यवाद सदा दी

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  • संजय भास्करDecember 11, 2012 at 5:18 PM

    wah arun bhai.......haeku me apki kalam badhiya chal rahi hai

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    1. अरुन शर्मा "अनंत"December 12, 2012 at 11:46 AM

      धन्यवाद संजय भाई

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  • अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com)December 13, 2012 at 8:18 AM

    गुलाबी ठण्ड
    पिक्चर अभी बाकी
    तैयारी करें |

    स्वीकार करें
    अनंत बधाइयाँ
    मस्त हाइकू |

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    1. अरुन शर्मा "अनंत"December 13, 2012 at 1:11 PM

      धन्यवाद अरुण सर

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