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Wednesday, June 13, 2012

नेताओं के विचार

तुम  वोट देना फिर से, हम चोट देंगे फिर से,
गरीबी से लहलहाता खेत, हम जोत देंगे फिर से,
ये सारी जनता - जनार्दन, मेरे हैं नोट के साधन,
करके इनकी जेब खाली, मेरे घर में भर लिया धन,  
हम आवाज उठाने वालों का गला घोंट देंगे फिर से,
हम जीत गए हैं, दुःख बीत गए हैं,
मेरे सुख के दिन आये, चैन सबका छीन लाये,
तुम विश्वास मुझपर करना, हम खोट देंगे फिर से,
जब आएगा इलेक्शन , हम तभी देंगे दर्शन,
बस दो-चार वादों से, जनता का जीतेंगे मन,
भ्रष्टाचार का नया हम, बिस्फोट देंगे फिर से.....
तुम  वोट देना फिर से, हम चोट देंगे फिर से.......
 

7 comments:

  1. Rakesh KumarJune 13, 2012 at 1:25 PM

    बहुत अच्छा और सटीक व्यंग्य किया है आपने अरुण जी.

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  2. अरुन शर्माJune 13, 2012 at 1:35 PM

    शुक्रिया SIR

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  3. Reena MauryaJune 13, 2012 at 1:47 PM

    क्या कहने..
    बहुत ही बेहतरीन व्यंग रचना....
    :-)बहुत खूब....:-)

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  4. Kailash SharmaJune 13, 2012 at 2:41 PM

    बहुत सुन्दर और सटीक व्यंग्य...

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  5. अरुन शर्माJune 13, 2012 at 2:45 PM

    बहुत -२ शुक्रिया

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  6. veena sethiAugust 22, 2012 at 4:27 PM

    kafi dhardar vyang hai, sundar rachna.

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    1. अरुन शर्माAugust 26, 2012 at 4:09 PM

      शुक्रिया आदरेया

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