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Wednesday, April 4, 2012

"सारी बातें सिर्फ तेरे लिए"

मोहोब्बत दिल से जफा करती है, वो खुद को मुझसे खफा करती है.
हर रोज मिलते है नए चेहरे, वो अब कहाँ दोस्त पुराने रखा करती है.

जख्म नए , पर दर्द वही पुराना है, दिल के दर्द से तड़प रहा जमाना है.
किसी का उठ गया भरोसा वफ़ा से, तो कोई रह गया अभी आजमाना है.
अभी दूरी के दर्द से उभरे तक नहीं, आगे भुगतना यादो का खामियाना है.

दर्द का दिल में खंजर उतार देती है, ये इश्क आँखों में समंदर बखेर देती है.
कभी मुस्कराती है फूल सी जिंदगी, तो कभी गम का बंजर उधार देती है.

ज़रा सा है बड़े काम करता है, ये दिल खुल्ले में कत्ले-आम करता है.
किसी का कर देता है नाम रोशन, तो किसी को यूँही बदनाम करता है.

"तेज बारिश बड़ा तूफ़ान संग सैलाब भी है, मेरा दर्द क्या खूब लाजवाब भी है.
कभी सवाल है मोहोब्बत का हर लफ्ज़, तो कभी दर्द भरा जवाब भी है,
             यही छोटी सी है जिंदगी तो यही बड़ा खवाब भी है"

किसीको जरुरत ही नहीं होती , तो किसीको पड़ जाती कम है .
कही इश्क ही है हर ख़ुशी तो कही पर बे-इन्तेहाँ ये गम है.
वो ख़ुशी से है भरी आँखें , और ये गम से पड़ी नम है.


"कोई सुबह नहीं है कोई शाम नहीं है, दर्द में थोडा भी आराम नहीं है.
आदत है उसकी मेरे जख्मो से खेलना, और दूजा कोई  काम नहीं है.
        मेरी दुनिया में भर चूका है, दर्द-वो -गम का खजाना
              और एक छोटा सा जखम भी उसके नाम नहीं है"

दिल खो गया धड़कन भटक रही है, यादों की पतंग जाके तुझपे अटक रही है.
जाते-२ जो तूने भूलने को कह दिया, ये बात आज तक मुझको खटक रही है.

तुझे पाया तो मिला गम,
तुझे खोया तो जखम,
मर-२ के जी रहे है
तुझसे मिलने के बाद हम.
साँसे पड़ी है धीमी,
और धड़कन भी हुई नम,
देखा नहीं जहाँ में
कोई मोहोब्बत सा बेरहम.

1 comment:

  1. संजय भास्करApril 12, 2012 at 8:36 AM

    रचना बहुत सुंदर है...स्वागत!

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